सोमवार, 31 अगस्त 2009

झूठ बोलते हैं ये जहाज बच्चों!


अवतार सिंह पाश





झूठ बोलते हैं
ये जहाज, बच्चों!
इनका सच न मानना
तुम खेलते रहो
घर बनाने का खेल...

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वे रेडियो नहीं सुनते
अखबार नहीं पढ़ते
जहाज खेतों में ही दे जाते हैं खबर सारी
हल को पकड़ कर वे केवल हंस देते हैं
क्योंकि वे समझते हैं कि हल की फाल पगली नहीं
पगली तो तोप होती है
हम अंधेरे कोनों में
गुमसुम बैठे सोच रहे हैं
और पल भर में चांद उगेगा
भूरा-भूरा सा
लूटा-लूटा सा
तो बच्चों को कैसे बताएंगे
इस तरह का चांद होता है ?

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रेडियो से कहो
कसम खाकर तो कहे
धरती अगर मां होती है तो किसकी ?
यह पाकिस्तानियों की क्या हुई ?
और भारत वालों की क्या लगी ?

1 टिप्पणी:

  1. वाह, पाश साहब की इतनी बेहतरीन कविता पढ़वाने के लिये तहेदिल से धन्यवाद..उम्मीद है अगली पीढ़ी इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश करेगी..बधाई!

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