शनिवार, 14 अगस्त 2010

अपने आइडियाज पर स्वयं विश्वास रखें

यह पोस्ट हमें सचिन गुप्ता ने भेजी हैः


ली लेबो फ्रेगरेंस कंपनी के पिनोट तथा एडी को अपना बिजनेस आरंभ करना था और वह भी स्वयं की कुछ शर्तों पर :

वे ऐसा ब्रांड बनाना चाहते थे जिसकी सभी रिटेल शॉप्स एक तरह से लैब का काम करे यानी ग्राहक आए और अपनी पसंद की सुगंध बनाए और ले जाए। उनका उद्देश्य था स्टॉक नहीं रखना।

वे बहुत ज्यादा मार्केटिंग पर पैसा खर्च करने की स्थिति में नहीं थे।

वे अरमानी और इसके जैसे बड़े ब्रांड्स को टक्कर देना चाहते थे, परंतु पैसा बिलकुल भी नहीं था

वे अच्छी सुगंध बनाना जानते थे और इसी में नई कंपनी खोलना चाहते थे। कैसे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ा और कैसे स्वयं वे आगे बढ़े।

कैसे प्रयत्न किए
पिनोट तथा एडी ने कई कंपनियों से फायनेंस की बात की, परंतु सभी ने मना कर दिया। पिनोट ने उनसे कहा कि वे आरंभिक रूप से अपने पहले स्टोर से 4 बोतल फ्रेंगरेंस बेचेंगे वह भी प्रति बॉटल 200 डॉलर। यह सुनकर उनकी हँसी भी उड़ाई गई।

कहीं से भी फायनेंस न होने की स्थिति में पिनोट ने अपना मकान बेच दिया तथा एडी के साथ एक बैडरूम के फ्लैट में रहने चले आए। दोनों ने मिलकर 1-1 लाख डॉलर जुटाए तथा चार अन्य दोस्तों ने इन दोनों को 30 हजार डॉलर की सहायता की जिसके लिए एक मित्र ने तो अपनी कार ही बेच डाली।



ऐसे बढ़े आगे
दोनों को यह समझ में आ गया था कि उन्हें जो भी करना है अपने बल पर ही करना है और सस्ते में करना है।

पहला स्टोर मैनहट्टन के पास आरंभ करना था, पर इसे बनाने के लिए आर्किटेक्ट ने 2 लाख डॉलर का बजट दिया। इतना पैसा सिर्फ एक स्टोर पर खर्च नहीं किया जा सकता था। लिहाजा दोनों ने एक स्थानीय इंजिनियर की सहायता ली और लाइसेंस लेने के बाद दोनों ने स्वयं ही स्टोर का निर्माण कर डाला।

एक फार्मा स्टोर की तरह उन्होंने फ्रेगरेंस शॉप आरंभ की और कुछ ही समय में यह शॉप चल पड़ी, क्योंकि अपनी क्रिएटिविटी के बल पर इन्होंने लोगों को इस बात के लिए मना लिया कि आप अपनी पसंद का और अपने नाम का फ्रेगरेंस बनाएँ न कि और किसी ब्रांड का।

कुछ ही समय में कंपनी ने चार स्टोर आरंभ कर दिए और सभी का निर्माण इन्होंने ही किया। व्यापार बढ़ने लगा और किसी भी प्रकार की उधारी नहीं होने से पहले दिन से ही कंपनी लाभ में रही। कंपनी ने किसी भी तरह का कॉर्पोरेट ऑफिस नहीं बनाया बल्कि सभी कर्मचारी लैपटॉप के माध्यम से संपर्क में रहते हैं। आज ली लिबो लगभग 4.5 मिलियन डॉलर का ब्रांड बन चुका है।

कंपनी ने जापान में जब अपना स्टोर आरंभ किया तब आरंभिक रूप से इन्हें काफी परेशानी आई, क्योंकि जापानी लोग ज्यादा परफ्यूम के शौकीन नहीं होते। ली लिबो ने जब जापानियों को समझाया कि परफ्यूम बनाना किसी कला से कम नहीं है तब जाकर जापानी लोग भी ली लिबो के दीवाने हो गए।

कंपनी की सफलता के सूत्र
क्रिएटिविटी और इनोवेशन के बल पर ही अब आप कस्टमर का दिल जीत सकते हैं।

अपने आइडियाज पर स्वयं विश्वास रखें

बिना कष्टों के सफलता नहीं मिलती

2 टिप्‍पणियां:

  1. बुलंद हौसलों से दुनियां को छू सकते हैं हम, पर अगर सदस्य टीम के हौंसले टूटे हो तो क्या करें

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  2. बहुत प्रेरणादायक पोस्ट.कष्ट भूल कर आगे बढने का हौसला मिला.

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